Oral Care: राखी 10वीं कक्षा की स्टूडैंट है और इन दिनों अपने मुंह से आती फाउल स्मेल से वह काफी परेशान रहती है. एक वक्त हर ऐक्टिविटी में सब से आगे रहने वाली लड़की अब शरमाई सब से अलग खड़ी रहती है और कम बोलती है. इस का रीजन है उस के मुंह से आती गंदी बदबू. वह जब भी अपने दोस्तों के साथ बैठती तो ठिठोली की वजह बन जाती है.

पिछले कुछ हफ्तों से उस के मुंह से काफी बदबू आ रही है, हालांकि वह दिन में 2 बार ब्रश करती है, खाने के बाद पानी से कुल्ला भी करती है, प्याज, लहसुन जैसी तेज स्मेल वाली चीजों से भी उस ने दूरी बना ली है लेकिन यह मुंह की दुर्गंध है कि उस का पीछा नहीं छोड़ रही है और अब इस की वजह से वह फुल कौन्फिडेंट भी नहीं रह पाती और साथ ही इनफीरियोरिटी कौंप्लेक्स की शिकार बनती जा रही है.

जब राखी डैंटिस्ट के पास पहुंची तो उसे अपने मुंह से आती दुर्गंध का कारण पता चला. दरअसल, उस की बेड ब्रेथ की वजह उस का खानपान नहीं बल्कि ड्राई माउथ था. जिस का सही इलाज करने पर अब वह बेड ब्रेथ से छुटकारा पा चुकी है.

राखी की तरह बहुत से लोग हैं जो दिन में 2 बार ब्रश करते हैं, फिर भी उन्हें मुंह से दुर्गंध (bad breath) की शिकायत रहती है. यह न सिर्फ एक असहज स्थिति बनाता है, बल्कि सामाजिक तौर पर भी आत्मविश्वास को कम करता है. ऐक्सपर्ट बताते हैं कि बेड ब्रेथ की वजह बहुत सी हैं. इस स्थिति को मैडिकल भाषा में हैलिटोसिस (Halitosis) कहा जाता है. यह एक मैडिकल टर्म है जो ऐसे मामलों के लिए इस्तेमाल होता है जब किसी व्यक्ति की सांसों से हमेशा बदबू आती है, चाहे वह ब्रश करे या माउथवाश इस्तेमाल करे.

डा. वंदना लकड़ा, बीडीएस, एमडीएस-इंडोडौंटिक्स बताती हैं कि मुंह से बदबू आना सिर्फ दातों की सफाई न करने से नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों से भी हो सकता है.

जीभ को साफ न करना : बदबू की सब से बड़ी वजह

अकसर लोग केवल दांत ब्रश करते हैं, लेकिन जीभ की सफाई भूल जाते हैं जिस से जीभ पर एक सफेद परत बन जाती है जिस में बैक्टीरिया, मरे हुए सेल्स और भोजन के कण जमा रहते हैं. इन्हें अगर हटाया न जाए तो यही बदबू का बड़ा कारण बनते हैं. इस के लिए जरूरी है कि आप  रोज सुबह और रात ब्रश के साथसाथ टंग क्लीनर से जीभ भी साफ करें जिस से गंदगी जीभ से हट जाए और आप को बेड ब्रेथ की शर्मिंदगी न उठानी पडे.

मसूड़ों की बीमारी (Periodontitis) : गंभीर समस्या की शुरुआत

अगर आप के मसूड़े लाल हो रहे हैं, सूजन है या ब्रश करने पर खून आता है, तो यह जिंजिवाइटिस (Gingivitis) का लक्षण हो सकता है. यह मसूड़ों की बीमारी का शुरुआती रूप होता है. अगर इस पर ध्यान न दिया गया, तो यह पेरियोडौंटाइटिस में बदल सकता है, जिस में मसूड़े दांतों से अलग हो जाते हैं यानी मसूङे ढीले पड़ जाते हैं और दातों और मसूडों के बीच में गैप आ जाता है. दांतों की जड़ें खुल जाती हैं, जिस से संक्रमण और बदबू बढ़ जाती है.

ऐसे में जब आप खाना खाते हैं या सेब, नाशपाती जैसा फल खाते हैं तो भी आप के दातों से खून निकलने की समस्या शुरू हो जाती है. कई बार लोग ब्रश के वक्त दातों से खून आने के कारण ब्रश करना ही बंद कर देते हैं लेकिन यह इस समस्या का हल नहीं है. मसूड़ों से खून आने पर ब्रश करना बंद न करें, बल्कि और सावधानी से दातों की सफाई करें. नियमित डैंटल चेकअप करवाएं.

दांतों में सड़न (Cavities) : छिपी हुई बदबू का कारण

कभीकभी दांतों में गहरा छेद हो जाता है, जिस में खाना फंस जाता है. अगर इसे साफ न किया जाए, तो वही खाना सड़ कर बदबू पैदा करता है. इसलिए जरूरी है कि  समयसमय पर दांतों की जांच कराई जाए और कैविटी हो तो उस का इलाज (फिलिंग या RCT) करवाएं.

पाचन और लीवर की समस्याएं : अंदरूनी बीमारी के संकेत

मुंह से आती बदबू का कारण केवल मुंह की सफाई नहीं करना नहीं है. अगर किसी को लंबे समय से गैस, एसिडिटी, गैस्ट्रिक रिफ्लैक्स या फैटी लिवर जैसी समस्याएं हैं, तो यह भी मुंह से आने वाली दुर्गंध का कारण हो सकता है.यह शरीर की आंतरिक गड़बड़ियों के संकेत होते हैं. पेट की तकलीफों को नजरअंदाज न करें, डाक्टर से सलाह लें और हैल्दी डाइट लें. ज्यादा तलाभुना या जंक फूड आप की इस समस्या को और बढ़ा सकता है.

टौंसिल या साइनस की दिक्कत : गले की वजह से बदबू

गले में टौंसिल स्टोन (सफेद बिंदु) या बारबार होने वाला संक्रमण मुंह की दुर्गंध का बड़ा कारण होता है.

कभीकभी नाक साइनस का मवाद  भी बदबूदार सांस पैदा करता है. ऐसे में ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवाएं.

शुष्क मुंह (Dry Mouth / Xerostomia)

हमारे मुंह में खुदबखुद बनने वाली लार मुंह को साफ रखने और बैक्टीरिया हटाने का प्राकृतिक तरीका है. अगर किसी कारण से हमारे मुंह में लार या सलाइवा बनना कम हो जाए, तो बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और बदबू शुरू हो जाती है. इस के कई कारण है जैसे पानी कम पीना, कुछ दवाइयां (ब्लड प्रेशर, डिप्रैशन आदि), उम्र बढ़ना, मुंह खुला रखना या मुंह खुला रख कर सोना. इस परेशानी से बचने के लिए आप को खूब पानी पीना चाहिए, शुगरफ्री च्युइंगम लें क्योंकि आप का मुंह ऐक्सट्रा सलाइवा बनाता है जिस से आप को ड्राई माउथ नहीं होता. ऐसी समस्या होने पर डाक्टर से सलाह अवश्य लें.

जबड़े की बनावट (Open Bite)

कुछ लोगों के जबड़े की बनावट ऐसी होती है कि वे मुंह पूरी तरह बंद नहीं कर पाते. ऐसे में लगातार मुंह के खुले रहने से मुंह सूखता है और लार की कमी के कारण बदबू आती है.  डैंटल/और्थोडौंटिक ट्रीटमैंट से इसे ठीक किया जा सकता है.

धूम्रपान, हुक्का और शराब : बैक्टीरिया का पसंदीदा माहौल

तंबाकू, गुटखा, हुक्का और शराब आदि मुंह की स्वाभाविक सफाई को बिगाड़ देते हैं. इन से बैक्टीरिया अधिक पनपते हैं और मसूड़े भी कमजोर होते हैं. इन आदतों को धीरेधीरे बंद करें और मुंह की सफाई पर खास ध्यान दें.

दवाइयों का साइड इफैक्ट्स

कुछ दवाइयां जैसे ऐंटीहिस्टेमीन, ब्लड प्रेशर की दवा, ऐंटीडिप्रेसेंट आदि मुंह सूखा देती हैं, जिस से बैक्टीरिया बढ़ते हैं और बदबू आती है. डाक्टर से सलाह ले कर वैकल्पिक दवा के बारे में पूछ सकते हैं. पानी खूब पिएं.

मुंह की प्राकृतिक फ्लोरा या आइएट्रोजेनिक हैलिटोसिस

जब सब ठीक हो फिर भी बदबू क्यों?

  • कभीकभी किसी व्यक्ति के मुंह में बैक्टीरिया की मात्रा और प्रकार ऐसे होते हैं कि वे स्वतः बदबू पैदा करते हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता है. यह बहुत दुर्लभ स्थिति होती है. ओरल हैल्थ में जब बात मुंह से दुर्गंध आती हो, तो यह किसी डैंटल ट्रीटमैंट, दवा या चिकित्सा प्रक्रिया के बाद उत्पन्न हुई हो.
  • जैसे किसी ट्रीटमैंट के बाद डाक्टर की सुझाई दवा आप को सूट न करे और उस के साइड इफैक्ट से मुंह सूख जाना, जिस से बदबू होने लगे.
  • दांत निकालने के बाद अगर घाव साफ न किया जाए तो वहां बैक्टीरिया जमा हो कर बदबू पैदा कर सकते हैं
  • कोई डैंटल रिस्टोरेशन (जैसे क्राउन या ब्रिज) अगर ठीक से फिट न हुआ हो और उस में खाना फंसे तो वहां से बदबू आ सकती है.

अब आप को पता कैसे चलेगा कि आप आइएट्रोजेनिक हैलिटोसिस के शिकार हैं और यह मुंह से आती  फाउल स्मेल आइएट्रोजेनिक है? तो अगर आप ने कोई नया डैंटल ट्रीटमैंट करवाया है या कोई नई दवा शुरू की है और उस के बाद से लगातार बदबू आ रही है तो संभव है आइएट्रोजेनिक हैलिटोसिस हो.

इस से बचने के लिए आप अपने डैंटिस्ट से फालोअप चेकअप लें.  अगर दवा की वजह से मुंह सूख रहा है, तो डाक्टर से विकल्प पूछें. जहां से बदबू आ रही है, वहां विशेष सफाई या ट्रीटमैंट करवाएं. अधिक पानी पिएं और जीभ की सफाई पर ध्यान दें.

सही ओरल हाइजीन कैसे रखें

डा. वंदना लकड़ा के अनुसार कुछ जरूरी आदतें अपनाएं :

 

  • दिन में 2 बार ब्रश करें, सुबह और रात को सोने से पहले.

 

  • हर बार कम से कम 2 मिनट तक ब्रश करें.

 

  • टंग क्लीनर से जीभ की सफाई करें.

 

*माउथवाश का सीमित समय तक इस्तेमाल करें (ब्रश के तुरंत बाद नहीं)

 

  • फ्लौस या इंटरडैंटल ब्रश से दांतों के बीच की सफाई करें.

 

  • हर 6 महीने में डैंटिस्ट से मिलें.

 

  • ब्रश के बाद कुल्ला न करें ताकि टूथपेस्ट का फ्लोराइड बना रहे.

 

  • मध्यम सख्त ब्रश चुनें और हर 3 महीने में बदलें.

 

ब्रशिंग की सही तकनीक क्या है

 

  • ब्रश को 45 डिग्री ऐंगल पर मसूड़ों की ओर झुका कर चलाएं

 

  • ऊपरी दांतों पर ब्रश ऊपर से नीचे और निचले दांतों पर नीचे से ऊपर करें.

 

  • ज्यादा जोर लगा कर ब्रश न करें, सौफ्ट हैंड से ब्रश करें वरना मसूड़ों को नुकसान हो सकता है.

 

  • एक ही हिस्से पर ज्यादा समय और दूसरे हिस्से पर कम ध्यान न दें. कई लोग मुंह के एक साइड तो अच्छे से ब्रश करते हैं और दूसरे साइड को नैगलेक्ट कर देते हैं. ऐसा न करें. दोनों साइड के दातों की सफाई अच्छे से करें.

मुंह की बदबू से छुटकारा पाने लिए जरूरी है, सही जानकारी, नियमित देखभाल और समयसमय पर जांच. ओरल हाइजीन का ध्यान रखने से इस समस्या को पूरी तरह से रोका जा सकता है.

Oral Care

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...